सही क्रॉस-सेक्शन क्यों मायने रखता है
केबल क्रॉस-सेक्शन एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है। बहुत छोटा — केबल गर्म होती है, इंसुलेशन पिघलता है, आग का खतरा। बहुत बड़ा — तांबे पर पैसे बर्बाद, मुश्किल इंस्टॉलेशन। इंजीनियर को सटीक मान खोजना होता है।
गणना दो मानदंडों पर होती है। दोनों में से बड़ा चुना जाता है।
मानदंड 1: हीटिंग (निरंतर करंट रेटिंग)
करंट प्रवाहित होने पर केबल गर्म होती है। IS 732 / IEC 60364 हर क्रॉस-सेक्शन के लिए अधिकतम करंट निर्दिष्ट करते हैं।
उदाहरण
दिया गया: Icalc = 25 A, तांबे की केबल, 3 कोर, कंड्यूट में।
IS तालिका अनुसार: तांबा 2.5 mm² → 27 A (पर्याप्त)।
जाँच: Icalc (25 A) ≤ Imax (27 A) → 2.5 mm² हीटिंग मानदंड पास।
मानदंड 2: वोल्टेज ड्रॉप
IS अनुसार, मुख्य पैनल से अंतिम उपभोक्ता तक वोल्टेज ड्रॉप — अधिकतम 5%।
सूत्र: ΔU% = (2 × L × Icalc × cos φ) / (γ × S × Unom) × 100%
उदाहरण
S = 2.5 mm² पर: ΔU% = 4.2% < 5% → पास। S = 1.5 mm² पर: ΔU% = 7.0% > 5% → फेल।
परिणाम: 2.5 mm² चुनें।
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